यूपी विधानसभा में बड़ा फैसला – अब अपनी बोली में रखिए बात!

यूपी विधानसभा में बड़ा फैसला – अब अपनी बोली में रखिए बात!

https://www.google.com/amp/s/navbharattimes.indiatimes.com/astro/religion-rituals/festivals-and-fasts/mahashivratri-2025-date-significance-in-hindi-mahashivratri-kab-hai/amp_articleshow/117387162.cmsमंगलवार को एक नई शुरुआत करने का प्रस्ताव रखती है, जहां सदन में यदि सदस्य अवधी, ब्रज, बुंदेली या भोजपुरी में बोलना पसंद करते हैं, तो उनके संबोधन का सीधा अनुवाद हिंदी में किया जाएगा।इसके अलावा, यदि सदस्य दूसरों के संबोधन को इन चार क्षेत्रीय बोलियों (अवधी, ब्रज, बुंदेली और भोजपुरी) में सुनना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सीट पर संबंधित चैनल चुनने की सुविधा मिलेगी, जिससे वे अपने ईयर प्लग्स में उसका सीधा अनुवाद सुन सकेंगे।

चूंकि सदन की आधिकारिक भाषा हिंदी है, इसलिए जो सदस्य अंग्रेजी के किसी उद्धरण/शब्द का प्रयोग करेंगे, उनसे उसका हिंदी अनुवाद देने के लिए कहा जाएगा। सदन में बोलियों का सीधा अनुवाद हिंदी में और हिंदी से बोलियों में करने की सुविधा उपलब्ध होगी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। अब विधानसभा में अवधी, ब्रज, बुंदेली और भोजपुरी बोलियों में भी सदस्य अपने विचार रख सकेंगे। खास बात यह है कि जो सदस्य इन क्षेत्रीय भाषाओं में बोलेंगे, उनके संबोधन का लाइव अनुवाद हिंदी में किया जाएगा। यह व्यवस्था पहली बार किसी राज्य विधानसभा में लागू की जा रही है, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है नई व्यवस्था?

मंगलवार से यूपी विधानसभा में सदस्यों को यह सुविधा दी जाएगी कि वे अवधी, ब्रज, बुंदेली और भोजपुरी जैसी लोकल बोलियों में बोल सकें। उनका भाषण अन्य सदस्यों को हिंदी में सुनने को मिलेगा। इसके लिए सदन में अनुवाद की विशेष व्यवस्था की गई है।

यदि कोई सदस्य दूसरे सदस्य का भाषण इन चार क्षेत्रीय बोलियों में सुनना चाहता है, तो वह अपनी सीट पर मौजूद चैनल का चयन कर सकता है। फिर ईयर प्लग्स के जरिए उसे उसकी पसंद की बोली में अनुवाद सुनाई देगा।

अनुवाद व्यवस्था की खास बातें:

विधानसभा की आधिकारिक भाषा हिंदी है।

सदस्य यदि अंग्रेजी में कोई बात कहेंगे, तो उसका अनुवाद हिंदी में करना होगा।

अवधी, ब्रज, बुंदेली, भोजपुरी से हिंदी और हिंदी से इन बोलियों में अनुवाद की सुविधा होगी।

सीट पर मौजूद सिस्टम से सदस्य अपनी पसंदीदा बोली चुन सकेंगे।

पहली बार किसी राज्य विधानसभा में यह सुविधा

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि संसद में अनुवाद की सुविधा पहले से है, लेकिन किसी राज्य विधानसभा में यह पहली बार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी शुरुआत है। इससे क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान मिलेगा और अन्य राज्यों की विधानसभाएं भी इसे अपनाएंगी।

नेता प्रतिपक्ष ने जताई आपत्ति

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य हिंदी समझते हैं, ऐसे में क्षेत्रीय बोलियों में बोलने से हिंदी कमजोर हो सकती है। उनका मानना है कि सदन की कार्यवाही में सभी को एक भाषा अपनानी चाहिए, ताकि संवाद में बाधा न आए।

नियमों में होगा बदलाव

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सुविधा शुरू हो रही है, और इसके बाद सदन के नियमों में संशोधन किया जाएगा। ताकि यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू की जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में क्षेत्रीय भाषाओं की गहरी जड़ें हैं।

अवधी, ब्रज, बुंदेली और भोजपुरी बोलने वालों की बड़ी संख्या है।

इस कदम से नेताओं को अपनी मातृभाषा में बात रखने की आजादी मिलेगी।

जमीनी मुद्दों पर बात करने में आसानी होगी।

भाषाई विविधता को बढ़ावा मिलेगा।

अंतिम विचार

उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह फैसला न सिर्फ राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। यह क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, इस पर मतभेद भी हैं, लेकिन यह तय है कि इससे लोकतांत्रिक संवाद और मजबूत होगा।

क्या यह व्यवस्था पूरे देश की विधानसभाओं में लागू होनी चाहिए? अपनी राय जरूर बताएं।

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